मेरे पापा का घर – एक कहानी

‘अरे पापा, आ गए आप। मैं चाय बनाने ही लगी थी।’ स्मिता ने कहते हुए माथुर साहब के हाथ से दूध का पैकेट लिया और चाय चढाने चली गयी। ‘हाँ, वो बारिश हुई न कल रात भर, तो रास्ते की हालत थोड़ी ख़राब थी, ऊपर से ये टैक्सी वाले सुबह से ही जल्दी में रहते…

नोटबंदी – एक कहानी

वैसे तो 8 नवम्बर की रात बहुत लोगों की, नींद के बगैर ही गुज़री थी लेकिन भागलपुर के गुप्ता जी का कारण कुछ और था। प्रोग्राम तो था की मोदी जी का सन्देश सुनते सुनते खाना खायेंगे और फिर रेडियो पर मनचाहे गीत सुनते हुए सो जाएंगे। खैर, बिजली विभाग का प्रोग्राम ज़रा अलग था।…

Happy Friendship Day: A Short Story

“Okay, Maa! If you want me to see the girl, I will.” I finally gave in to the nagging. I was three years into a job, had my own place, about the ‘marriageable age’ and was seeing no one. I was the perfect recipe for an arranged marriage and it seemed I was raised just…

The Journey – A Short Story

The wind was gushing into my face. Jolting me from my thoughts and at the same time, putting me to sleep. I was in the middle of nowhere. Fields on one side of the tracks and few mimics of a hill on the other. The train cut through the night as a python does through…

Khaan Chacha Ki Dukaan (Part 1) – A Short Story

ऐसा लगता है जैसे की ये बात हमेशा से ही हो। ऐसी इमारतें या दुकाने जिनके ना होने के बारे में कभी ज़हन में भी नहीं आता। हर शहर की अपनी कुछ पहचानें होती हैं, कोई अड्डा होता है कहीं, कहीं कोई किराने की दूकान, और कहीं झील के किनारे एक बड़ा सा पत्थर। बस…

Short Story: Bombay, Baarish aur Ek Kahaani

पिछले महीने एक साल हुए मुझे बॉम्बे में। कई बार लोगों ने टोका मुझे की अब तो यहां के बाशिंदे भी इसे मुंबई कहते हैं, तुम भी आदत डाल लो, लेकिन मैं तो मैं ही हूं। वही अड़ियल, ज़िद्दी इंसान। बचपन से ही आदत थी मेरी, दुनिया से अलग चलने की। कोई cool बनने की चाहत…

Swarg se Jannat: A Short Story

16 साल बाद किस्मत फिर मुझे अपने शहर ले कर आई थी। वो शहर जहाँ से मेरे ही शहर वालों ने मेरे परिवार को बाहर ढकेल दिया था। उस रात हमारे साथ और भी सैकड़ो परिवार बेघर हुए थे। वैसे तो बहुत छोटा था मैं उस वक़्त, लेकिन पापा के मुंह से इतनी बार वो…

Aakashwaani: A micro story

वैसे तो कंपनी वाले फ्लाइट की टिकट करा के देते हैं लेकिन ट्रैन के सफर का मेरे हिसाब से कोई मुक़ाबला नहीं है। जब आप सफर में होते हैं तो वक़्त रुक जाता है जैसे। वक़्त! आप एक जगह पर एक भूमिका निभा कर आते हैं और दूसरी जगह दुसरे लोग और दूसरी भूमिका आपका…

Samar ka Video Game : A Short Story

बार बार पापा मिन्नतें कर के हार चुका था समर। पापा समझते ही नहीं थे की वो वीडियो गेम कितना ज़रूरी हो गया था समर की इज़्ज़त के लिए। बस में जब अमित और निशांत कॉण्ट्रा के बारे में बातें करते, तो उसे चुप हो जाना पड़ता था। पिछली गर्मियों की छुट्टी में जब निशांत…

Sheher, Safar aur Humsafar : A Short Story

ट्रेन आदतन तो नहीं, लेकिन वक़्त पे थी। हमारे यहाँ की रेल गाड़ियों की भी अपनी अकड़ होती है। आप जब जो चाहते हैं उसका ठीक उल्टा करती हैं ये। आप शायद ये सोच रहे होंगे, की मैं भी क्या अजीब आदमी हूँ की जो भूली भटकी ट्रेन वक़्त पे पहुँच गयी, उसकी तारीफ़ की…