मेरे पापा का घर – एक कहानी

‘अरे पापा, आ गए आप। मैं चाय बनाने ही लगी थी।’ स्मिता ने कहते हुए माथुर साहब के हाथ से दूध का पैकेट लिया और चाय चढाने चली गयी। ‘हाँ, वो बारिश हुई न कल रात भर, तो रास्ते की हालत थोड़ी ख़राब थी, ऊपर से ये टैक्सी वाले सुबह से ही जल्दी में रहते […]

नोटबंदी – एक कहानी

वैसे तो 8 नवम्बर की रात बहुत लोगों की, नींद के बगैर ही गुज़री थी लेकिन भागलपुर के गुप्ता जी का कारण कुछ और था। प्रोग्राम तो था की मोदी जी का सन्देश सुनते सुनते खाना खायेंगे और फिर रेडियो पर मनचाहे गीत सुनते हुए सो जाएंगे। खैर, बिजली विभाग का प्रोग्राम ज़रा अलग था। […]

Khaan Chacha Ki Dukaan (Part 1) – A Short Story

ऐसा लगता है जैसे की ये बात हमेशा से ही हो। ऐसी इमारतें या दुकाने जिनके ना होने के बारे में कभी ज़हन में भी नहीं आता। हर शहर की अपनी कुछ पहचानें होती हैं, कोई अड्डा होता है कहीं, कहीं कोई किराने की दूकान, और कहीं झील के किनारे एक बड़ा सा पत्थर। बस […]