in Sunday wala blog

Sunday wala Blog #7: Maun, Maturity aur Confusion

कुछ लिखने की कोशिश कर रहा हूं। परसों से कुछ लिखा नहीं जा रहा। पहले सोचा की कोई कविता लिख लूं। पर फिर लगा की ना मैं अभी इतना mature हुआ हूं, ना ही पुलवामा हादसे को ले कर मेरे एहसास। मैं गुस्से में हूं, और रहूंगा अभी थोड़े दिन। पता नहीं, जब ये गुस्सा रंग बदले तो शायद मैं कोई कविता लिख कर व्यक्त कर पाऊं।

खैर, गुस्सा सिर्फ मैं नहीं हूं। गुस्सा हम सब हैं। मेरे सोशल मीडिया पर सब तरफ गुस्से, दुख और देशभक्ति का एक ऐसा सैलाब है, जो खौल रहा है। खौल रहा है किसी पर बरसने के लिए। मैं शायद इस सैलाब को ना समझ पाऊं, लेकिन मैं इस सैलाब के कारण को समझ सकता हूं।

दुख और गुस्से में क्या ज़्यादा है, समझ नहीं आ रहा। सब एक दुशमन ढूंढ रहे हैं, जिसको चीर दें, ताकि सुकून आ जाए। मन तो मेरा भी ऐसा ही कर रहा है। फर्क इतना है कि मुझे मेरा दुश्मन नहीं मिल रहा। मिल तो लोगों को भी नहीं रहा, लेकिन उन्होंने किसी ना किसी को ढूंढ लिया है।

मेरी तरह मेरे कुछ दोस्त भी कंफ्यूज हैं।

एक दोस्त है बचपन का, जिसके साथ मैंने स्कूल के 6 साल गुजारे थे। जब इंडिया पाकिस्तान का मैच होता तो अपने मोहल्ले के लड़कों से लड़ता था। क्यूंकि उनमें से कुछ लड़कों का फेवरेट प्लयेर सचिन तेंदुलकर नहीं, शहीद अफरीदी था। क्यूंकि पहले उसे समझ नहीं आता था, की उसके मोहल्ले के वो लड़के पाकिस्तान के जीतने पर पटाखे क्यूं जलाते थे। क्यूंकि बाद में उसको समझ में आने लगा। समझ में आ गया तो और कंफ्यूज हो गया।

मेरा एक और दोस्त कंफ्यूज है। कश्मीरी है। पैदा ही कंफ्यूज हुआ है। किताबों में पढ़ा है कि कश्मीर भारत का अटूट अंग है। लेकिन आस पड़ोस से कभी भी ये नहीं सुना। हमेशा उल्टा सुना है। कश्मीर में रहता है तो शांति से रहना चाहता है। दिल्ली में रहता है तो शांति से रहना चाहता है। बॉम्बे में रहना चाहता है, तो शांति से रहना चाहता है। उसे ना आजाद कश्मीर से मतलब है, ना भारत की गुलामी से। उसे बस बे मतलब का प्रोपोगंडा नहीं चाहिए। कंफ्यूज है।

लेकिन इन सब से ज़्यादा कन्फ्यूज्ड हूं मैं। मैं जानता हूं कि आज की दुनिया के ज़्यादातर आतंकवादी मुसलमान थे। लेकिन मैं अपने दोस्तों को भी जानता हूं। मैं जानता हूं कि कश्मीरी भारत को अपना नहीं मानते। मगर क्या हर कश्मीरी को मार देना उपाय है? खौल उठता हूं मैं याद कर के उन जवानों की शहादत को। लेकिन मैं मौन हूं, क्यूंकि मेरे पास मेरे सवालों के जवाब नहीं है। अभी मैं इतना mature नहीं हुआ कि ये जवाब दे पाऊं। इतना mature नहीं हुआ कि कुछ लिख पाऊं।

Comments

comments