Sunday wala Blog # 10: Sunday wali Raddi

“दो महीना हो गया बोलते बोलते, एक फ़ोन नहीं बदला रहा मेरा। बोले थे की ये वाला बेचना है, वो भी नहीं बेच रहे!” मेरी माँ ने जैसे ही ये कहा, मैं सीधा फिसल कर अपने बचपन के अप्रैल – मई एक किसी संडे में पहुँच गया। “दो हफ्ते से आप टाल रहे हैं, इतना […]

Sunday wala blog #9: Sunday wali Picnic

“अबे चिकन कटवा लेना, बोनलेस। और दही रख लेना। और सुन, चिकन मसाला और ginger garlic paste भी।” ये पिछले आधे घंटे में मेरे ‘सीनियर मैनेजर’ दोस्त का तीसरा फ़ोन था। ऑफिस में तो भाईसाहब 5 वेंडर, 6 लोग और करोडो का बजट handle करते थे। लेकिन दोस्तों की पिकनिक मैनेज करना कोई ऐसी वैसी […]

Sunday Wala Blog #8: Sunday wali Hajamat

“ये संडे भी बहाना बनाओगे की जाओगे बाल कटवाने?” मम्मी ने साफ़ साफ़ पूछ लिया। मेरी माँ की ज़िन्दगी की currently दो ही priorities हैं – मेरी शादी और मेरी हजामत। पापा का मानना है की दोनों में बहुत ख़ास फर्क नहीं होता। आपको चुप चाप एक जगह पर बैठे रहना होता है, और जो […]

Sunday wala Blog #7: Maun, Maturity aur Confusion

कुछ लिखने की कोशिश कर रहा हूं। परसों से कुछ लिखा नहीं जा रहा। पहले सोचा की कोई कविता लिख लूं। पर फिर लगा की ना मैं अभी इतना mature हुआ हूं, ना ही पुलवामा हादसे को ले कर मेरे एहसास। मैं गुस्से में हूं, और रहूंगा अभी थोड़े दिन। पता नहीं, जब ये गुस्सा […]

Sunday वाला blog #6: बचपन वाले त्यौहार

बचपन के सबसे खूबसूरत यादों में से एक बड़ा हिस्सा जुड़ा होता है त्योहारों से। बचपन की उम्र तक आप रिश्तेदारों की तरफ भागते हैं, उनसे दूर नहीं। अपने चचेरे, ममेरे, फुफेरे, मौसेरे भाई बहनो को भाई-बहन ही मानते हैं, cousins नहीं। और त्यौहार इन सब को एक साथ लाते थे, बचपन, रिश्तेदार, भाई और […]

Sunday वाला blog #5 : Sunday वाला connection

सुबह हुई। संडे की सुबह थी, तो थोड़े आराम से हुई। अधखुली आँखों और अधजगे हाथों से मैंने अपना मोबाइल उठाया। उठाते ही मैंने WiFi on किया। सुबह उठते ही मोबाइल उठाना, WiFi कनेक्ट करना, और दुनिया भर की बकवास consume करना हमारे सुबह का एक अभिन्न अंग बन गया है। कहीं न कहीं तो […]

Sunday वाला blog #4 : Sunday वाले फूफा/ मामा/ मौसा

“और, बड़े हो कर क्या बनोगे?” “आई एस” सुबह सुबह पापा का फ़ोन बजा तो पता चला इस संडे का appointment फूफा/ मामा/ मौसा के नाम है। ( फूफा/ मामा/ मौसा यूँ लिखा गया है की अगर इनमे से किसी के हाथ ये blog पड़ भी जाए, तो मेरे घर में महाभारत का मिनी-एपिसोड ना […]

बिना ज्ञान वाला Republic Day पोस्ट

26 जनवरी, Republic Day, गणतंत्र दिवस। बचपन में कई सालों तक मुझे ये दिन समझ में नहीं आता था। ऐसा नहीं था की लोगों ने समझाने की कोशिश नहीं की। मम्मी ने काफी डिटेल में समझाया – लेकिन संविधान समझना इतना आसान होता तो फिर हम वाकई में गणतंत्र नहीं हो जाते? पापा ने बताया […]

Sunday वाला Blog #3: Sunday वाला TV

कुछ Sundays जरुरत से ज़्यादा ही आलसी होते हैं। कुछ भी करने की इच्छा नहीं होती। ना आज क्रिकेट खेलेंगे, ना ही बाजार से समोसे जलेबी आएगी। आज तो चाय भी बमुश्किल बनेगी। नहाने पर एक लम्बा अंतर्द्वंद चलेगा, pros एंड cons में विवाद होगा, और ज्यादातर ये फैसला बाद में लेने पर टाल दिया […]

Sunday वाला blog #2: Sunday वाला मैच

वैसे तो संडे की सुबह थोड़े आराम से ही होती है, लेकिन आज की सुबह थोड़ी जल्दी हो गयी थी। बहुत दिनों के बाद आज वाला संडे आया था। बहुत दोनों बाद क्रिकेट वाला संडे आया था। बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी में इंडियन टीम ने कमाल क्या दिखाया, ऑफिस में एक नया जोश आ गया था […]