Sunday wala Blog #16: Sunday wala Cinema

मिडिल क्लास परिवारों में थिएटर में सिनेमा देखना एक वार्षिक उत्सव से कम नहीं। उंगलियों पर गिन सकता हूं वो फिल्में जो बचपन से आजतक थिएटर में सपरिवार देखे हैं। आज भी जब किसी सन्डे फिल्म देखने का प्रोग्राम पिच करना होता है, तो पूरे रिसर्च के साथ proposal बनता है। पैसे भले आप दे […]

Sunday Wala Blog #15: Paani Chala Gaya

“पानी अभी तक नहीं आया?” पापा ने मेरी तरफ आशा भरी निगाहों से मेरी तरफ देखा। आज सुबह से ही पानी गायब था। बिना खबर ऐसे पानी गायब हो जाना विपदा से कम ना था। पापा को अभी अभी पाकिस्तान का दर्द महसूस हो रहा था, जो मोदी जी के वॉटर ट्रीटी के तोड़ने के […]

Sunday Wala Blog #14: Sunday wali Film

“ये क्या लगाए बैठे हैं?” मां ने टीवी की तरफ देखते हुए, अचरज भरी आवाज़ में कहा। दरअसल पापा टीवी पर कार्टून देख रहे थे। “बचपना करना तो आदत है आपकी, लेकिन आज कुछ ज़्यादा नहीं हो गया?” मम्मी ने अपने तंज पर एक पॉवर अप किया। “अरे 336 चैनल छान गया, ये टीवी पर […]

Sunday wala blog #13: Sunday subah ka nashta

एक परफेक्ट सन्डे बहुत सारी चीज़ों से मिल कर बनता है। टीवी, मूवी, और किस्सों के अलावा जो एक चीज हर सन्डे को खास बनाती है, वो है सन्डे का नाश्ता। बचपन की बात याद है, उस समय हमारे देश में वीकेंड जैसा कुछ नहीं होता था, सिर्फ सन्डे होता था। जिसका मतलब ये था […]

Sunday Wala Blog #12: Roz Roz ka Power Cut

कल रात अचानक कुछ ऐसा हुआ को आमुमन बड़े शहरों में होता नहीं है। बिजली चली गई। तुरंत ही ऑफिस से आया था, मन था ac चला कर आराम से मैच देखूंगा। इधर मैंने remote का बटन दबाया और उधर पूरी सोसायटी में अंधेरा छा गया। तुरंत ही बोरियत का डर मुझे सताने लगा। जी […]

Sunday wala Blog # 11: Mummy Ka Sunday

“मेरा संडे नहीं है क्या? आप लोगों का ही संडे है?”, मम्मी ने लगभग झुंझलाते हुए कहा। “अरे, तुम्हारा तो हर रोज़ ही संडे होता है!” पापा ने बड़ी सहजता से, हमेशा की तरह चुटकी लेते हुए कहा। हर रोज़ संडे होना! ख्वाब जैसा ही है। झूठ नहीं बोलूंगा, बहुत सालों तक मुझे भी यही […]

Sunday wala Blog # 10: Sunday wali Raddi

“दो महीना हो गया बोलते बोलते, एक फ़ोन नहीं बदला रहा मेरा। बोले थे की ये वाला बेचना है, वो भी नहीं बेच रहे!” मेरी माँ ने जैसे ही ये कहा, मैं सीधा फिसल कर अपने बचपन के अप्रैल – मई एक किसी संडे में पहुँच गया। “दो हफ्ते से आप टाल रहे हैं, इतना […]

Sunday wala blog #9: Sunday wali Picnic

“अबे चिकन कटवा लेना, बोनलेस। और दही रख लेना। और सुन, चिकन मसाला और ginger garlic paste भी।” ये पिछले आधे घंटे में मेरे ‘सीनियर मैनेजर’ दोस्त का तीसरा फ़ोन था। ऑफिस में तो भाईसाहब 5 वेंडर, 6 लोग और करोडो का बजट handle करते थे। लेकिन दोस्तों की पिकनिक मैनेज करना कोई ऐसी वैसी […]

Sunday Wala Blog #8: Sunday wali Hajamat

“ये संडे भी बहाना बनाओगे की जाओगे बाल कटवाने?” मम्मी ने साफ़ साफ़ पूछ लिया। मेरी माँ की ज़िन्दगी की currently दो ही priorities हैं – मेरी शादी और मेरी हजामत। पापा का मानना है की दोनों में बहुत ख़ास फर्क नहीं होता। आपको चुप चाप एक जगह पर बैठे रहना होता है, और जो […]

Sunday wala Blog #7: Maun, Maturity aur Confusion

कुछ लिखने की कोशिश कर रहा हूं। परसों से कुछ लिखा नहीं जा रहा। पहले सोचा की कोई कविता लिख लूं। पर फिर लगा की ना मैं अभी इतना mature हुआ हूं, ना ही पुलवामा हादसे को ले कर मेरे एहसास। मैं गुस्से में हूं, और रहूंगा अभी थोड़े दिन। पता नहीं, जब ये गुस्सा […]